Bhopal Gas Tragedy से लेकर Vishakhapatnam Gas Leak तक : प्रमुख औद्योगिक आपदाओं पर फिर से विचार

Bhopal Gas Tragedy से लेकर Vishakhapatnam Gas Leak तक : प्रमुख औद्योगिक आपदाओं पर फिर से विचार

1984 के Bhopal Gas Tragedy से लेकर अभी हाल ही में 2020 में हुई Vishakhapatnam Gas Leak तक में भारत में औद्योगिक नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए, लेकिन क्या यह कारगर है ? कमसे काम अगर अभी हाल ही में हुई घटना कर्मो को देखें तो यक़ीनन नहीं | क्यों के अगर यह सरे नियम कारगर होते तो बार बार ऐसे मनुष्यकृत आपदाएं बार बार होती इस वजह से सैकड़ों लोगों की जाने जाती !

 पर जब हर प्रमुख आपदाओं के बाद बिभिन्न तरीके का समिति का गठन होता है, पुरे घटनाक्रम का जाँच पड़ताल होती है और उसकी बिस्तृत समीक्षा के बाद कभी कुछ दिशानिर्देश दिए जाते है तो कभी नियमों में बदलाव होता है , अगर सरकार और प्रशासन इतनी ही गंभीर है, तो घटनाक्रमों की रोकथाम क्यों नहीं हो पा रही हैसुरक्षा के लिए सैकड़ो नियम तो बन जाते है, लेकिन उसका पालन क्यों नह्नि हो पाता ! कमी कहाँ रह जाती है इसकी समीक्षा जरुरी है | तो बार बार दोहराती इन आपदाओं के बारे में कोई भी राय कायम करने से पहले, १९८४ से अबतक हुए प्रमुख औद्योगिक आपदाओं की बिस्तृत बिबरण ले लेते है |

१९८४ भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy, 1984) : 

Bhopal Gas Tragedy जिसे Union Carbide Gas Tragedy भी कहा जाता है , यह घटना 3 December 1984  को
मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित Union Carbide India Limited प्लांट में हुई थी, जिसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा मनुष्यकृत औद्योगिक आपदा के रूप में माना जाता है |

2006 में दी गयी सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार इस घटनाक्रम में मिथाइल आइसोसाइनेटनामक केमिकल गैस रिसाब की वजह से 5,58,125  घायल हुए थे जिसमे से 3,787  मृत्यु, 3900 स्थायी शारीरिक अक्षमता और 38478 अस्थायी शारीरिक अक्षमता शामिल है | जब की कुछ एक्टिविस्ट मानते है की मौत का आंकड़ा 20-25 हज़ार के लगभग था |


इस दुर्घटना के कारणों पर भले ही आज भी बहस चलती रहे, पर बस्तुतः पानी की पाइप लाइन में सामान्य रख राखाओ के समय प्रतिवाह के वजह से MIC टैंक के अंदर पानी चलागया था और फिर रासानिक प्रतिक्रिया के वजह से असीमित carbon dioxide Gas की उत्पति हुई, जिसके फैलने से यह आपदा की परिस्थिति उत्पन हुआ |

Korba Chimney Collapse, 2009

वेदांत ग्रुप के कोरबा, छतीशगढ स्थित “भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (बालको)” के निर्माणधीन पावर प्लांट में 23 September 2020 को एक निर्माणाधीन चिमनी तास की पत्तो की तरह ढह गया था | EPC Contractor SEPCO द्वारा नियुक्त किया गया Garmon Dunkerley (GDCL) कंपनी उक्त चिमनी का काम कर रही थी, जिसका 275 मीटर में से 106 मीटर कंक्रीट शैल का काम हो चूका था |